Kuch Betuke Vichaar
Sunday, June 3, 2012
गुरुर-ए-हुस्न
हमारे शेर सुन कर भी जो खामोश इतना है
खुदा जाने गुरुर-ए-हुस्न मैं मदहोश कितना है
किसी प्याले से पुछा है सुराही ने शबाब मय का
जो खुद बेहोश हो वो क्या बताये होश कितना है - अनजान
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