Saturday, December 22, 2012

एक काला आदमी

एक काला आदमी
बहुत ही काला
काला स्याह
सुपर काला
जैड ब्लैक

डबल अफ्रीकन
एल्डर सन ऑफ अमावस्या
औंधे तवे का ताऊ
पहाडी कौए का पड़दादा

कोयल संप्रदाय का दादू
बंगाल का काला जादू

तारकोल जिसके पैरों में भक्ति भाव से पसरता हो,
कोयला जिसका रूप रंग पाने के लिये, सदियों तक जमीन के नीचे बैठ कर तपस्या करता हो

जिसदिन उस कालानुभाव के दर्शन हुए, जमीन थमी रह गयी
अब इससे ज्यादा क्या कहुँ,
इतना कहने के बाद भी, मेरे पास शब्दों की कमी रह गयी

शादी होते ही माँ-बाप को धक्के देकर बाहर निकाल देने वाली औलाद सा कपूत,
कुल मिला कर इतना काला जितनी किसी भ्रष्ट नेता की करतूत

एक दुकान पर गया
ना शर्म ना हया
बोला – फेयर एण्ड लवली है
दुकानदार ने कहा नहीं
तो कहने लगा -
फेयर-फेयर नैस जैसी कोई और क्रीम सही
दुकानदार बोला वो भी नहीं
तो बोला – कोई और
तो जब इस बार भी गर्दन दुकानदार ने इंकार में हिलाई
तो कहने लगा – Cherry Blossom ही दे दे
कम से कम चमक तो बनी रहेगी भाई।।

Monday, December 17, 2012

तानशाह पत्नी



की तानशाह पत्नी बागी पति से बोली
हाय हाय मुए बिल्ली के गले में घंटी क्यों बाँधी थी चूहे
क्यों झूठे वाडे किये पलकों पे बिठाने के सितारे तोड़ लाने के
बाहों में उठाने के
करके अपना मूह भोला
भूका पति बोला
तुम मेरी जवानी को अब तक नहीं समझी
तुमको धिक्कार है
अरे बात भी की वो भी बाहों में उठाने की
बन्दा को कंधा उठाने को बेकरार है 

Friday, November 2, 2012

दिल्लगी

बादशाहों के सलाम आते हैं,
फ़क़ीरों को यूँ पैगाम आते हैं.

घर में मेले लगते हैं आशिकों के,
हमें आशिक़ी के हुनर तमाम आते हैं.

दिल्लगी करता है महबूब हमारा,
अब ख़त भी हमें बेनाम आते हैं.

बख़्त फ़क़ीरी

Sunday, September 30, 2012

दिल खोल के पी जाए

दोस्ती जब किसीसे की जाए 
दुश्मनों की भी राय ली जाए 

मौ का जेहर है फिजाओं में 
अब कहा जाके सास ली जाए 

बस इसी सोच में हूँ डूबा हुआ 
ये नदी कैसे पार की जाए 

बोतलें खोल के तो पी बरसो 
आज दिल खोल के भी पि जाए

..... राहत इंदोरी

Sunday, August 19, 2012

अस्थियाँ तक खा गए

सैकड़ों नदियों को पीकर कश्तियाँ तक खा गए,
गाँव गलियां सब पचाकर बस्तियां तक खा गए,
वो वतन कि भूख को कैसे मिटायेंगे भला,
जो शहीदों कि चिताओं की अस्थियाँ तक खा गए!!

Monday, July 30, 2012

बद्किस्मती

मत पूछिए किस कदर है बद्किस्मती का आलम...

मै सजदा भी करता हूं तो काबा सरक जाता है... "

Sunday, July 22, 2012

संगदिल

ये संगदिलों की दुनिया है, ज़रा संभल के चलना 'दोस्त';

यहाँ पलकों पे बिठाया जाता है, नज़रों से गिराने के लिये!

Sunday, June 3, 2012

गुरुर-ए-हुस्न



हमारे शेर सुन कर भी जो खामोश इतना है


खुदा जाने गुरुर-ए-हुस्न मैं मदहोश कितना है


किसी प्याले से पुछा है सुराही ने शबाब मय का


जो खुद बेहोश हो वो क्या बताये होश कितना है  - अनजान 

Sunday, February 5, 2012

सारा जहाँ राज़दार अपना है

तू पास भी हो तो दिल बेक़रार अपना है

कि हमको तेरा नहीं इंतज़ार अपना है

मिले कोई भी तेरा ज़िक्र छेड़ देते हैं

कि जैसे सारा जहाँ राज़दार अपना है - अहमद फ़राज़

Saturday, January 28, 2012

वक्त


एक लम्हा ऐसा भी आता है
जिसमे बीता हुआ कल नज़र आता है
बस यादें रह जाती है याद करने को
और वक्त सब कुछ लेकर गुजार जाता है

Thursday, January 26, 2012

इश्क


जमी केलिए आसमा झुक रहा है
किसी के लिए कारवां रुक रहा है
लगी है उधर इश्क की आग शायद
तभी तो उधर से धुँआ उठ रहा है

Monday, January 23, 2012

चाहत


चाहत के बिना जहा में गुजारा नहीं होता
हर शाम के माथे पे सितारा नहीं होता
तूफ़ान जब आती है कुछ डूब भी जाता है
हर कश्ती की किस्मत में किनारा नहीं होता

Sunday, January 22, 2012

दर्पण

तेरी आँखों में देख लू चेहरा
मुझको दर्पण की जरूरत क्या है
तेरी यादे बसी हो जिस दिल में
उसको धडकन की जरूरत क्या है 

Thursday, January 19, 2012

याद


फकत एक तेरी याद में सनम
न सफर के रहे न वतन के रहे
बिखरे है लाश के इस कदर टुकड़े हैं 
न कफ़न के रहे न दफ़न के 

Saturday, January 14, 2012

मोहोब्बत


चाहत के परदे में नफरत है मुमकिन
तो नफरत के परदे मी चाहत भी होगी
अगर कोई खफा है तुम्हे अपना समझ कर
तो उसको यक़ीनन तुमसे मोह्प्ब्बत भी होगी 

Sunday, January 8, 2012

इश्क



प्यासे को एक कतरा पानी काफी हैं
इश्क में चार पल की जिंदगी काफी है
डूबने को समुन्दर में जाए कहाँ
उनकी पलकों से टपका दो बूंदे काफी है

Thursday, January 5, 2012

मंजिल




हर सास कह जाती है एक नयी कहानी
हर सुबह ले आती है एक नयी कहानी
रास्ते तो बदलते है हर दिन 
लेकीन मंजिल रह जाती है वोही पुरानी