Thursday, July 25, 2013

सिर्फ़ हाथ का क्या करेगा?

डरते झिझकते
सहमते सकुचाते
हम अपने होने वाले
ससुर जी के पास आए,
बहुत कुछ कहना चाहते थे
पर कुछ
बोल ही नहीं पाए।

वे धीरज बँधाते हुए बोले-
बोलो!
अरे, मुँह तो खोलो।

हमने कहा-
जी. . . जी
जी ऐसा है
वे बोले-
कैसा है?

हमने कहा-
जी. . .जी ह़म
हम आपकी लड़की का
हाथ माँगने आए हैं।

वे बोले
अच्छा!
हाथ माँगने आए हैं!
मुझे उम्मीद नहीं थी
कि तू ऐसा कहेगा,
अरे मूरख!
माँगना ही था
तो पूरी लड़की माँगता
सिर्फ़ हाथ का क्या करेगा?

Monday, July 22, 2013

तुम भी झूठे हो

मुझसे बिछड़ के ख़ुश रहते हो,
मेरी तरह तुम भी झूठे हो 

कुछ तो मजबूरियां रही होंगी,
यूं कोई बेवफ़ा नहीं होता।

अजीब शख्स है नाराज होके हंसता है,
मैं चाहता हूं ख़फ़ा हो,तो ख़फ़ा ही लगे।

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जायेगा,
इतना मत चाहो उसे वो बे-वफ़ा हो जायेगा।

एक दिन तुझ से मिलने जरूर आऊंगा
जिंदगी मुझ को तेरा पता चाहिए।

पलकें भी चमक जाती हैं सोते में हमारी,
आंखों को अभी ख्वाब छुपाने नहीं आते।

देने वाले ने दिया सब कुछ अजब अंदाज से,
सामने दुनिया पड़ी है और उठा सकते नहीं।

मिल भी जाते हैं तो कतरा के निकल जाते हैं,
हाय मौसम की तरह दोस्त बदल जाते हैं।

हम अभी तक हैं गिरफ्तार ए मुहब्बत यारों,
ठोकरें खा के सुना था कि सम्भल जाते हैं।

Thursday, July 11, 2013

हाशिम फिरोजाबदी

मोहोब्बत का घना बादल बना देता तो अच्छा था
मुझे उस आँख का काजल बना देता तो अच्चा था 
उसे पाने की खाहिश अब मुझे जीने नहीं देती 
खुदाया तू मुझे पागल बना देता तो अच्चा था - हाशिम फिरोजाबदी