Tuesday, February 20, 2018

मैं साथ तिरंगा लाया हूँ ।


फूल और माला नहीं हाथ, मैं साथ तिरंगा लाया हूँ ।
झुका हुआ सिर बैरी का, सौगात तिरंगा लाया हूँ ।
नई नवेली दुल्हन की तो, मांग पोंछ मैं आया था ।
मात-पिता को देश की खातिर, रोता छोड़ मैं आया था ।
उनके त्याग की खातिर मैं, दे मात मौत को आया हूँ ।
फूल और माला नहीं हाथ, मैं साथ तिरंगा लाया हूँ ।

जगह जगह दुश्मन मेरा तो, घात लगाकर बैठा था ।
मैं भी अपने देश की खातिर, जान लगाकर बैठा था ।
समझाने से वह तो हरगिज, समझ न पाया बोली से ।
हथियार उठाकर फिर तो उसको, समझाया था गोली से ।
दुश्मन को औकात बता, मैं उसे झुकाकर आया हूँ ।
फूल और माला नहीं हाथ, मैं साथ तिरंगा लाया हूँ ।

जब तक भी मैं जिंदा हूँ, इन बाजू में बल है जब तक ।
कोई दुश्मन मेरे देश को, छू न पायेगा तब तक ।
सूरज पश्चिम से यह निकले चाहे हिमालय झुक जाए ।
बहती हुई सभी नदी का प्रवाह भले ही रुक जाए ।
देशभक्ति का रुके न जज्बा, फौलाद तिरंगा लाया हूँ ।
फूल और माला नहीं हाथ, मैं साथ तिरंगा लाया हूँ ।

Friday, February 16, 2018

अच्छे लगते स्वान हैं

नफरत करते इंसानों से, अच्छे लगते स्वान हैं ।
भोग लगे है पाषाणों को, भूखे मरते इंसान हैं ।
जूठन को जो ढूँढ रहे हैं, अपनी भूख मिटाने को ।
हाथ फैलाकर मांग रहे जो, कुछ भी दे दे खाने को ।
कोई बताए हमको क्या, वे भी नहीं इंसान हैं
नफरत करते इंसानों से , अच्छे लगते स्वान हैं ।

धर्म के ठेकेदार कहाँ हैं जो उन्माद फैलाते हैं ?
किस्मत के इन मारों को क्यों घर वे नहीं ले जाते हैं ?
धर्म नाम पर करें सियासत, इंसानों को बांट रहे ।
जहर पिलाकर नफरत का ये, अपने हित हैं साध रहे ।
मजलूमों के नहीं इलाही, या उनके न भगवान हैं ?
नफरत करते इंसानों से , अच्छे लगते स्वान हैं ।

जो न खाए उसे खिलाएं, आभूषण से उसे सजाएं ।
दूध से पत्थर के देवों को, नासमझे स्नान कराएं ।
भगवानों की आँखों पर, जाने कैसी परत चढ़ी है ?
उनके घर के बाहर ही, भिखमंगों की भीड़ खड़ी है ?
सम्पूर्ण जगत के मालिक क्यों, धरती पर मेहमान हैं
नफरत करते इंसानों से, अच्छे लगते स्वान हैं ।

करो परिश्रम कुछ पाने को, तभी तो कुछ मिल पाएगा
बिना परिश्रम खुदा भी तुमको कुछ भी न दे पाएगा ।
तर्क से परखो हर घटना को अपनी आंखें खोलो ।
बिन परखे ही पाखंडी की तुम, हरगिज जय मत बोलो ।
ईश नाम पर ना जाने कितने चला रहे दुकान हैं ।
नफरत करते इंसानों से , अच्छे लगते स्वान हैं ।

Wednesday, February 14, 2018

राजनीति के योद्धा

आसमान के सपने देकर छीन धरातल लेते हैं ।
राजनीति के योद्धा हमको कष्ट बड़ा ही देते हैं ।
बातों से ही मन भरते हैं बातों में उपबंध करें ।
मिले निवाला हर मानव को नहीं ऐसा प्रबंध करें ।
करके बातें बड़ी बड़ी वे सिंहासन पा लेते हैं ।
राजनीति के योद्धा हमको कष्ट बड़ा ही देते हैं ।

करें बुराई प्रतिद्वंदी की खुद की प्रशंसा खूब करें ।
दूजा भी है समर्थ आदमी हरगिज न मंजूर करें ।
चित भी इनकी पट भी इनकी अंटा इनके बाबा का ।
पांच साल तक जनता लेती घंटा इनके बाबा का ।
दोनों हाथों खूब तिजोरी अपनी ये भर लेते हैं ।
राजनीति के योद्धा हमको कष्ट बड़ा ही देते हैं ।

सभी बड़े ओहदों पर बैठे इनके भाई भतीजे हैं ।
जांच घोटालों की होती पर मिलते नहीं नतीजे हैं ।
जज व थानेदार भी तो मिलकर ही रहते हैं इनसे ।
कोई बेचारा अपनी विपदा आखिर कह दे किनसे ?
जैसा ये आदेश करें वे वैसा ही कर देते हैं ।
राजनीति के योद्धा हमको कष्ट बड़ा ही देते हैं ।

पांच साल के बाद जब समय चुनाव का आता है ।
शेर सा दिखने वाला नेता पूँछ हिलाता आता है ।
जाति और धर्म का शस्त्र ये तो भरपूर चलाते हैं ।
अपनी जीत की खातिर ये तो बलवे तक करवाते हैं ।
नियम कायदे सारे ये तो टाँग खूँट पर देते हैं ।
राजनीति के योद्धा हमको कष्ट बड़ा ही देते हैं ।

Friday, February 9, 2018

बिवी और हम !


वो तो हमारे लिये जमानेसे लड जाती है और
एक हम है जो जमाने के लिये उससे लड जाते है ।
वह तो सारे जमाने का प्यार हमपे लुटाती है और
एक हम है जो सारे जमाने के लिये उसको रूलाते है ।
वह तो सारी दुनिया से बाते कर लेती है और
एक हम है जो खुदसेभी दुरी बनाके बैठे है ।
वह पल पल जिंदगी का लुफ्त उठाती है और
एक हम है जो खुशियोमेभी उदास बैठे रहते है ।
वह हसती रोती भी है वह चिखती चिल्लाती भी है और
एक हम है जो हर वखत अपने आप मे उलझे रहते है ।