Tuesday, November 29, 2011

गरीब


मंदिर की सीढिया अब चढ़ी नहीं जाती
वह बैठे गरीबो की हालत जो देखी नहीं जाती
रहम दिल है खुदा ऐसा सुना करते थे
पर लगता है गरीबो की फ़रियाद भी उनके आगे सुनी नहीं जाती

Friday, November 25, 2011

मोहोब्बत

हमको तो दुनिया में कोई बेवफा न मिला 

कमी गर पायी तो अपनी मोहोब्बत में ही पायी - एक अंजान कवि

Thursday, November 24, 2011

प्यार



प्यार करके उसका इंतज़ार ही पाया है
तन्हाई में भी उसे हर पल पाया है
मिल जाए खुदा तो पूछेंगे उनसे
क्यों आप ने हर बार मुझे ही आजमाया है

Tuesday, November 22, 2011

इस दिले तंग में किस किस को जगह दूं
गम रहे, दम रहे , फ़रियाद रहे या याद रहे

Sunday, November 20, 2011

ग़ालिब Vs इकबाल Vs फैज़

ग़ालिब VS इकबाल VS फैज़

ग़ालिब :

शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर ...


या वो जगह बता जहाँ पर खुदा नहीं ...

इकबाल :


मस्जिद खुदा का घर है पीने की जगह नहीं ...


काफ़िर के दिल में जा वहां खुदा नहीं .....

फैज़ :


काफ़िर के दिल से आया हूँ ये देख कर ...


खुदा वहां मौजूद है लेकिन उसे पता नहीं