Thursday, May 24, 2018

औरत पालने को कलेजा चाहिये

एक दिन बात की बात में
बात बढ़ गई
हमारी घरवाली
हमसे ही अड़ गई
हमने कुछ नहीं कहा,
चुपचाप सहा
कहने लगी- "आदमी हो
तो आदमी की तरह रहो
आँखे दिखाते हो
कोइ एहसान नहीं करते
जो कमाकर खिलाते हो
सभी खिलाते हैं
तुमने आदमी नहीं देखे
झूले में झूलाते हैं

देखते कहीं हो
और चलते कहीं हो
कई बार कहा
इधर-उधर मत ताको
बुढ़ापे की खिड़की से
जवानी को मत झाँको
कोई मुझ जैसी मिल गई
तो सब भूल जाओगे
वैसे ही फूले हो
और फूल जाओगे

चन्दन लगाने की उम्र में
पाउडर लगाते हो
भगवान जाने
ये कद्दू सा चेहरा
किसको दिखाते हो
कोई पूछता है तो कहते हो-
"तीस का हूँ ।"
उस दिन एक लड़की से कह रहे थे-
"तुम सोलह की हो
तो मैं बीस का हूँ।"
वो तो लड़की अन्धी थी
आँख वाली रहती
तो छाती का बाल नोच कर कहती
ऊपर ख़िज़ाब और नीचे सफेदी
वाह रे, बीस के शैल चतुर्वेदी!

हमारे डैडी भी शादी-शुदा थे
मगर क्या मज़ाल
कभी हमारी मम्मी से भी
आँख मिलाई हो
मम्मी हज़ार कह लेती थीं
कभी ज़ुबान हिलाई हो

कमाकर पांच सौ लाते हो
और अकड़
दो हज़ार की दिखाते हो
हमारे डैडी दो-दो हज़ार
एक बैठक में हार जाते थे
मगर दूसरे ही दिन चार हज़ार
न जाने, कहाँ से मार लाते थे

माना कि मैं माँ हूँ
तुम भी तो बाप हो
बच्चो के ज़िम्मेदार
तुम भी हाफ़ हो
अरे, आठ-आठ हो गए
तो मेरी क्या ग़लती
गृहस्थी की गाड़ी
एक पहिये से नहीं चलती

बच्चा रोए तो मैं मनाऊँ
भूख लगे तो मैं खिलाऊँ
और तो और
दूध भी मैं पिलाऊँ
माना कि तुम नहीं पिला सकते
मगर खिला तो सकते हो
अरे बोतल से ही सही
दूध तो पिला सकते हो
मगर यहाँ तो खुद ही
मुँह से बोतल लगाए फिरते हैं
अंग्रेज़ी शराब का बूता नहीं
देशी चढ़ाए फिरते हैं

हमारे डैडी की बात और थी
बड़े-बड़े क्लबो में जाते थे
पीते थे, तो माल भी खाते थे
तुम भी चने फांकते हो
न जाने कौन-सी पीते हो
रात भर खांसते हो
मेरे पैर का घाव
धोने क्या बैठे
नाखून तोड़ दिया
अभी तक दर्द होता है
तुम सा भी कोई मर्द होता है?
जब भी बाहर जाते हो
कोई ना कोई चीज़ भूल आते हो
न जाने कितने पैन, टॉर्च
और चश्मे गुमा चुके हो

अब वो ज़माना नहीं रहा
जो चार आने के साग में
कुनबा खा ले
दो रुपये का साग तो
अकेले तुम खा जाते हो
उस वक्त क्या टोकूं
जब थके -माँदे दफ़्तर से आते हो

कोई तीर नहीं मारते
जो दफ़्तर जाते हो
रोज़ एक न एक बटन तोड़ लाते हो
मैं बटन टाँकते-टाँकते
काज़ हुई जा रही हूँ
मैं ही जानती हूँ
कि कैसे निभा रही हूँ
कहती हूँ, पैंट ढीले बनवाओ
तंग पतलून सूट नहीं करतीं
किसी से भी पूछ लो
झूठ नहीं कहती
इलैस्टिक डलवाते हो
अरे, बेल्ट क्यूँ नहीं लगाते हो
फिर पैंट का झंझट ही क्यों पालो
धोती पहनो ना,
जब चाहो खोल लो
और जब चाहो लगा लो

मैं कहती हूँ तो बुरा लगता है
बूढ़े हो चले
मगर संसार हरा लगता है
अब तो अक्ल से काम लो
राम का नाम लो
शर्म नहीं आती
रात-रात भर
बाहर झक मारते हो

औरत पालने को कलेजा चाहिये
गृहस्थी चलाना खेल नहीं
भेजा चहिये ।"

Saturday, May 12, 2018

माँ - बाप

एक कहानी माँ बाबा की बोलो कहा से शुरू करूँ.......
पहले तो उनके श्री चरणों में शीश झुका कर नमन करूँ....
माँ-बाबा मेरे सर्व पूजनीय...भगवन पूजा बाद में....
तीनो लोक की खुशियां मिलती बस इनके आशीर्वाद में...
पापा घर की नींव है तो माँ उसमें नर्म बिछोना है....
क्या उनकी तारीफ करूँ मैं ,उनसे खुश घर का हर इक कोना है....
पापा मेहनत करते है तो माँ हिम्मत बन जाती है....
जोड़ जोड़ कर पाई पाई..बच्चो का भविष्य बनाती है.....
ख्याल रखते है पापा हमारा...जो चीज जरूरत की होती...
ला देते है इक पल में हमें...कमी किसी चीज की ना होती...
बचपन खेला इनकी गोदी में...इनको बहोत सताया है....
करी शैतानी बहोत मगर...बस इनसे लाड प्यार ही पाया है.....
डर लगता जब बचपन मे,हम इनके आँचल में छुप जाते..
साथ जो बैठे माँ-बाबा के.....हम अच्छी शिक्षा ही पाते...
खून पसीने से सींचा घर बाबा ने..माँ ने इसे संवारा दिया...
पालन पोषण कर हम बच्चो का..फिर गृहस्थ जीवन मे उतार दिया..
रहना सिखाया मिल जुलकर हम सबको,साथ साथ चलते जाना..
कैसी भी हो विकट समस्या..कभी नही तुम घबराना....
जैसे हम सब साथ रहे अब तक..आगे भी बढ़ते जाना....
दुनिया है बेरंग ये कहते...बातों में इनकी तुम मत आना...
त्याग-तपस्या माँ बाबा की बहोत कठिन...इनके कितने उच्च विचार है...
प्यार मोहब्बत ही रहे घर उनके...यही जीवन का आधार है...

Sunday, May 6, 2018

बात करो मुझसे

बात मजहब की करो तो ना करो मुझसे
बात इन्सानों की करो तो करो मुझसे।।

ये रंगों में झंडों में मेरा यकीन नही
बात तिरंगे की करो तो करो मुझसे।।

एक अदद इंसान हूँ ना हिन्दू ना मुसलमान हूँ
बात भाईचारे की करो तो करो मुझसे।।

बात तरक्की, विकास  की हो तो करो मुझसे
बात झगड़े विनाश की हो तो ना करो मुझसे।।

बात धर्म और जात की हो तो ना करो मुझसे
बात बस आवाम की हो करो मुझसे।।

बात मंदिर मस्जिद की करनी है ना करो मुझसे
बात हिंदुस्तान की करनी है तो करो मुझसे।।

Friday, May 4, 2018

कुछ कहानियाँ सुनना चाहता हूँ

जिन्दगी सौ दर्द की दास्तान होती है
हर तस्वीर से कितनी कहानियाँ बयान होती हैं।
फिर भी ऐ जिन्दगी तु बहुत खुबसुरत है
हर पल तुझे जीने की चाह रहती है।।
तेरी मुस्कुराहट पे मैं हर पल निसार होता हूँ
तेरे संग चलने को मैं हरदम तैयार रहता हूँ
ना कोई सवाल ना किसी की उल्फत है
पर जिन्दगी सच मुझे तेरी बहुत जरुरत है।।
तुझे हो न हो मुझे तुझसे बहुत प्यार है
तेरे बिना मेरा दिल सूना-सूना सा है
बिन तेरे धडकनों का सुर अधूरा है
कहने को जिन्दा हूँ पर खुशियों से दूरी है।।
चुप रहना चाहता हूँ पर अल्फाज फिसल जाते हैं
लाख रोकता हूँ पर अरमान मचल जाते हैं
कभी मेरा हाथ पकड मुझे भी साथ ले के चल
मैं तेरे धडकनों में बसना तेरे रंगो में घुल जाना चाहता हूँ।।
ऐ जिन्दगी मैं तुझे बहुत-बहुत प्यार करना चाहता हूँ....!
तेरी बाँहों में रहना तेरी आँखों में बसना चाहता हूँ
लगा ले मुझे गले से मैं धडकनों को सुनना चाहता हूँ
कुछ कहानियाँ कहना कुछ कहानियाँ सुनना चाहता हूँ।।