Friday, January 10, 2014

कैसे कैसे ज़ज्बात मिले

कैसे कैसे ज़ज्बात मिले |
अपनों से आघात मिले ||

बात अमन की करे जहाँ में |
ऐसी भी कोई जात मिले ||

आया परिंदा ख़ाली हाँथ |
फिर वही हालात मिले ||

बरसी आँखे भूमिपुत्र की |
पतझड़ सी बरसात मिले ||

उजालो की अब चाह नहीं |
जब मिले तब रात मिले ||

सिर झुका तब कहीं जाना|
पत्थर में ज़ज्बात मिले ||

आह ना हो ज़ख्म भी ना हो |
कोई ऐसा भी प्रभात मिले ||

कभी ऐसा भी मंज़र हो,ख़ुदा |
किस्मत को भी मात मिले ||