कैसे कैसे ज़ज्बात मिले |
अपनों से आघात मिले ||
बात अमन की करे जहाँ में |
ऐसी भी कोई जात मिले ||
आया परिंदा ख़ाली हाँथ |
फिर वही हालात मिले ||
बरसी आँखे भूमिपुत्र की |
पतझड़ सी बरसात मिले ||
उजालो की अब चाह नहीं |
जब मिले तब रात मिले ||
सिर झुका तब कहीं जाना|
पत्थर में ज़ज्बात मिले ||
आह ना हो ज़ख्म भी ना हो |
कोई ऐसा भी प्रभात मिले ||
कभी ऐसा भी मंज़र हो,ख़ुदा |
किस्मत को भी मात मिले ||
अपनों से आघात मिले ||
बात अमन की करे जहाँ में |
ऐसी भी कोई जात मिले ||
आया परिंदा ख़ाली हाँथ |
फिर वही हालात मिले ||
बरसी आँखे भूमिपुत्र की |
पतझड़ सी बरसात मिले ||
उजालो की अब चाह नहीं |
जब मिले तब रात मिले ||
सिर झुका तब कहीं जाना|
पत्थर में ज़ज्बात मिले ||
आह ना हो ज़ख्म भी ना हो |
कोई ऐसा भी प्रभात मिले ||
कभी ऐसा भी मंज़र हो,ख़ुदा |
किस्मत को भी मात मिले ||