कभी ये रो रो के अपनी बात ख़ूब सुनाता है,
कभी हँसती अँखियों से यूँ ही भी बह जाता है।
ना कहे जो बत्तीस दाँतो की पहरेदारी में जिभा,
वो ये मूक रहकर भी सब से सब कह जाता है।।
कभी हँसती अँखियों से यूँ ही भी बह जाता है।
ना कहे जो बत्तीस दाँतो की पहरेदारी में जिभा,
वो ये मूक रहकर भी सब से सब कह जाता है।।