Monday, September 4, 2023

जेलेरिया

 एक दिन मैंने अखबार में पढ़ा

जेल में मिलती है सुविधाएं आलीशान

देखने को रंगीन टीवी

पढ़ने को पत्र पत्रिकाएं

और खाने को मिलते हैं

एक से एक बढ़िया पकवान

यह पढ़कर मुझ बेरोजगार को लगा

कि यहां तो मिलती हैं फाइव स्टार सुविधाएं नौकरी ढूंढने से तो अच्छा है

किसी तरह जेल ही चला जाए ।

अब मुझे दिन में रात में

सर्दी गर्मी बरसात में

कश्मीर की वादियों की जगह

जेल के हसीन, रंगीन,दिलकश

सपने आने लगे

रोज रोज लुभाने लगे

मेरी आत्मा मुझे बार-बार कचोटती

मूर्ख कवि सम्मेलन में चला जाता है

इससे अच्छा जेल क्यों नहीं हो आता है

जेल जाने की धुन में

मैं इस कदर बीमार पड़ गया

मलेरिया की जगह

जेल एरिया में जकड़ गया

इस अवस्था में मैं

घर पर भी कैदियों वाले कपड़े पहने लगा

और घर की खिड़की के सींखचो पर

बैठने लगा

जब -जब भी कोई मेहमान मिलने आता

तो मुझे ऐसा लगता

जैसे जेल में कोई मिलाई करने आया

जब बात हद से आगे बढ़ गई

तो मेरे पैरों की जोड़ी

तिहाड़ जेल की ओर बढ़ गई ।

मैंने वहां देखा

एक कैदी रिवाल्विंग चेयर पर बैठा

रसमलाई खा रहा था

और एक पुलिस वाला

उसके पैर दबा रहा था

और साथ-साथ गिड़गिड़ा रहा था

-"भाग जा -भाग जा मेरे बाप

कब तक हमारी छाती पर मूंग दलेगा

चालीस किलो से

अस्सी किलो का तो हो गया

और कितना पलेगा "

कैदी मुस्कुराया -"ज्यादा मत गिड़गिड़ाओ

जाओ हमारे लिए किंग साइज की सिगरेट

और एक जोड़ा पान लेकर आओ

सिपाही के जाते ही

मैंने कैदी को दंडवत प्रणाम किया

और कहा -"हे महान आत्मा मेरा मार्गदर्शन कीजिए

मेरी जेल जाने की हार्दिक इच्छा है

इन चरणों में जगह दीजिए

कोई उपाय बताइए और किसी भी तरह से सही मुझे जेल ले जाइए "

कैदी पिंघला-"अच्छा ,तो तू जेल जाएगा मिठाई और पकवान खाएगा

ऐसा कर किसी की टांग तोड़ दे

या अपनी खोपड़ी किसी की खोपड़ी से भेड़ दे या फिर कोई लड़की छेड़ दे "

यह ब्रह्म वाक्य लेकर मैं वापस घर आया

और तुरंत अपनी खोपड़ी लेकर

एक गंजे पड़ोसी की खोपड़ी को

काफी नुकसान पहुंचाया

पर उसे तो गुस्सा ही नहीं आया

मैं चकराया और बोला -"जा जा फौरन पुलिस में रिपोर्ट लिखा "

लेकिन वह मुस्कुराया बोला -"अच्छे बच्चे ऐसा नहीं करते "

और मुझे घर छोड़ आया ।

एक दिन मैंने मोहल्ले के एक

आवारा लड़के की टांग तोड़ दी

और घर पर करने लगा इंतजार

कि पुलिस वाले अब आयें अब आएं

लेकिन थोड़ी देर बाद ही

मोहल्ला सुधार समिति के कुछ सदस्य आए बोले -"आपने उस आवारा की टांग तोड़ी धन्यवाद

हम सार्वजनिक रूप से

आपकी प्रशंसा करना चाहते हैं

और इस पुण्य कार्य के लिए

आपका अभिनंदन करना चाहते हैं "।

अभिनंदन के एक हफ्ते बाद

वही आवारा लड़का मेरे घर आया

और मिठाई के डिब्बा मेरे हाथ में थमाया

फिर बोला -"आपसे मिलकर तो

मेरी जिंदगी बदल गई

उस दिन आपने टांग तोड़कर

मुझे विकलांग किया

और इस चक्कर में मुझे नौकरी मिल गई

मैंने सोचा अब तीसरा उपाय क्या किया जाए बस में

किसी लड़की को ही छेड़ दिया जाए

बस में घुसते ही मैंने

एक सुंदर कन्या की तरफ आंख चलाई

वह कुछ नहीं बोली

तो मैंने उसकी उंगली दबाई

लेकिन वह तो कमाल थी

उसने अपनी उंगली ही नहीं हटाई

उंगली से हम थोड़ा और आगे बढ़े

तो दो पुलिस वाले हमारे सर पर आ चढ़े

बोले -"शर्म नहीं आती सरेआम लड़की को छेड़ता है

अपनी ऊंगली उसकी उंगली से भेड़ता है

तभी तीसरे पुलिस वाले ने उन्हें टोका

-"अभी रहने दे -रहने दे

सस्पेंड कर देगा दरोगा

सरेआम लड़की छेड़ रहा है

जरूर किसी बड़े बाप का बेटा होगा "

पहले वाला बोला -"नौकरी गई भाड़ में

यह बड़े बाप के बेटे

ऐसा ही करते हैं शराफत की आड़ में "।

लड़की दरअसल छिढी ही नहीं थी

उंगली उसकी उंगली से भिढ़ी ही नहीं थी इसलिए वह बीच में बोली -"भाई साहब ,

क्यों इतने हैंडसम लड़के को बदनाम करते हैं इन्होंने तो मुझे छेढ़ा ही नहीं

उस लड़की को छेड़ना मुझे और सता गया क्योंकि शाम को ही उसका बाप

रिश्ता लेकर आ गया ।

एक दिन मैं एक बड़े से होटल में पहुंचा

वहां छत्तीस प्रकार के

व्यंजनों का आनंद उठाया

और जब बिल देने का नंबर आया

तो मुंह बिचकाया

होटल वाला समझदार था

तुरंत पुलिस को फोन मिलाया

पुलिस वाले आए

और मुझे सीधे अदालत ले गए

लेकिन अपनी तो किस्मत खराब थी

इस बार मुझे जज साहब गच्चा दे गए

बोले -"हम इंसाफ करते हैं

तुम्हारा पहला अपराध है

इसलिए माफ करते हैं "।

एक दिन मैंने

एक महिला का पर्स चुराया

और भागा-भागा पुलिस स्टेशन आया

वह महिला वहीं बैठी पाई

और जैसे ही उसने

पर्स चोरी जाने की रिपोर्ट लिखवाई

मैंने तुरंत पर्स को थानेदार के आगे सरकाया और हथकड़ी लगवाने की मुद्रा में

अपने हाथों को बढ़ाया

थानेदार ने मेरे हाथों को झिड़क दिया

-"हूँ, मुफ्त में ही जेल जाना चाहता है "

इतना कहकर उसने एक फोन मिलाया

और अपने साले को थाने में बुलाया

मुझे दो डंडे मार कर वापस भिजवा दिया

और पर्स चुराने के आरोप में

उस साले ने अपने साले को अंदर करवा दिया

उसके बाद मैंने कितने ही प्रयास किए

कुछ जानबूझकर कुछ अनायास किए

पर जेल वाले तो मुझसे खाए हुए थे खार

मुझे मुझे जेल में ले जाने को नहीं थे तैयार लेकिन मैंने जहां-जहां भी

ये कविता सुनाई

लोगों की भावनाओं ने ली

ऐसी अंगड़ाई

की सबकी इच्छा जेल जाने की हो आई

लोगों पर इस कविता का इतना प्रभाव पड़ा

कि चारों ओर जेल भरो आंदोलन चल पड़ा कैदियों की संख्या हो गई ज्यादा

और पुलिस उन्हें छोड़ने पर थी आमादा

एक बार तो पुलिस वालों ने

कैदियों की आत्मा ही झिंझोड़ दी

कैदियों के भागने के लिए

जेल की दीवार खुद ही तोड़ दी

पर उनके तो सारे आइडिये ही

उल्टे पड़ गए

अगले दिन गिनती हुई

तो एक सौ पच्चीस कैदी

ज्यादा बढ़ गए

अब तो मुझे

पाठकों से ही कुछ उम्मीद है

इतना क्वालिफाइड अपराधी

खुले आम घूम रहा है

जेल जाने के लिए कोई सोर्स ढूंढ रहा है

अब आप ही कुछ उपाय बताओ

किसी भी तरह से सही

मुझे आप जेल तो भिजवाओ

वैसे आप भी क्या उपाय बताओगे ?

अगर आपके पास ही कुछ उपाय होते

तो इस समय आप

घर पर या पुस्तकालय में नहीं

बस हवाई जहाज या रेल में नहीं

बल्कि जेल में मेरी यह कविता पढ़ रहे होते।

 

Sunday, January 30, 2022

मज़ा आ गया यार

 

 

कवि सम्मेलन के समाप्त होने पर

रात के तीन बजे

मैं अपने घर की ओर जा रहा था

दिन भर की थकान से थकी

सुनसान सड़क पर

सामने से एक पुलिसमैन आ रहा था

मिलते ही नजरें

वह मुझे देखकर हँसा

और मैं उसे देखकर घबराया

वह इसलिए हंसा

कि सुबह-सुबह अच्छा मुर्गा फंसा

और मैं इसलिए घबराया

कि मंगलवार के दिन

यह शनिचर कहां से आ टकराया

जैसे ही उसने

अपनी मूँछों पर दो मरोड़ दिए

मैंने अपने दोनों हाथ जोड़ दिए

फिर कहा -

"हे !कोमलांगियों के शील के रक्षक

नेताओं के अंग के रक्षक

आप महान हो

आप को मेरा प्रणाम हो "

सिपाही अपनी प्रशंसा सुनकर

फूला नहीं समाया

उसने अपनी मरणासन्न बीड़ी में

अंतिम कश लगाया

फिर मुर्गी फँसाऊ

पुलिसिया अदा में बोला -

"ठीक है... ठीक है...

मेरी बढ़ाई की बातें करके

ज्यादा होशियारी मत जता

अपना नाम -पता बता "

मैंने कहा -

"मेरा नाम -बलात्कार

पिता का नाम -भ्रष्टाचार

मां का नाम -महंगाई

गांव -राजधानी दिल्ली

मोहल्ला -छल

मकान नंबर -राजनीतिक दल "

वह बोला -"

यह तुम अपना पता बता रहे हो

या मुझे

भारत का नक्शा दिखा रहे हो "

मैंने कहा -"नक्शा ही दिखा रहा हूं

और तुम्हें इसलिए बता रहा हूं

कि तुम देश के सिपाही हो

सिपाही का मतलब जानते हो ?

सिपाही ने आंखें तरेर कर कहा -

"हां !जानता हूं "

मैंने कहा -"जानते हो तो फिर यह

गुंडागर्दी क्यों बढ़ रही है ?"

सिपाही हंसकर बोला -

"यार ,आदमी तुम मजेदार हो

चलते -फिरते दैनिक अखबार हो

अफ़वाहों के सहारे खड़े हो

पर एक बात बताओ

तुम बेचारी पुलिस के पीछे क्यों पड़े हो

ये सज्जन पुलिस वाले

किसी का क्या बिगाड़ते हैं ?

मैंने कहा -"पुलिस और सज्जन !

भेड़िया और शाकाहारी !!

आप की वर्दी से

सज्जनता की कैसी सुगंध आ रही है

पर श्रीमान जी !आपकी यह जेब

गर्भवती महिला के पेट -सी

क्यों फूलती जा रही है ?"

उन्होंने फरमाया

एक बच्चे की तरह मुझे समझाया

"फूलना अर्थात फैलना

विकास का सूचक है

गर्भवती महिला का पेट दर्शाता है

जनसंख्या के विकास को

लाला का पेट

मिलावट के विकास को

देखते नहीं

सारा देश फूल रहा है

लेकिन मेरी जेब देखकर

आपका दम क्यों फूल रहा है ?"

मैंने कहा -"नाराज मत होइए

जरा मुस्कुराइए

मुझे एक बात और बताइए

आप की वर्दी का रंग ख़ाकी क्यों है ?"

वह बोला -

"सब कुछ खाक में मिलाने के लिए "

मैंने कहा -वाह खाकेश जी

अमावस्या के राकेश जी

आप वाकई महान हैं

पर सुना है

बलात्कार के पुण्य कार्य में

आप का बहुत योगदान है "

वह बोला -"बलात्कार ।

यह क्या बला है ?"

मैंने कहा -ये

खूनी भेड़ियों के

मनोरंजन की एक कला है

जिसमें तुम लोगों का

बहुत बड़ा हाथ है ।"

सिपाही ने अकड़ कर कहा -"

हाथ है तो है

कर ले हमारा क्या करेगा ।

साला ,हमारे बलात्कार को

देख कर रो रहा है

अबे बलात्कार के बच्चे

इस देश में ,आज़ादी के बाद से

बलात्कार के सिवाय

और क्या हो रहा है ?

वहां देख

जज का कायदों से

नेता का वायदों से

नारों से ,आश्वासनों से

जनता का सरकार से

सरकार का जनता से

देश से

और यहां तक कि

बलात्कार से बलात्कार हो रहा है

उन्हें तू कुछ नहीं कहता

महिलाओं को बीच में घसीट रहा है

मुझे छेड़ -छेड़ कर उकसाएगा

एक और बलात्कार करवाएगा

अच्छा...अब बहुत देर हो गई

तू कुछ न कुछ पूछे जा रहा है

इतनी रात गये

तू कहां से क्या कर के आ रहा है ?"

मैंने कहा -"भाई साहब

मैं भी आपकी तरह शरीफ आदमी हूं

मैं शब्दों के साथ

बलात्कार करके आ रहा हूं

मैं ही नहीं

वहां अधिकांश लेखनियाँ

यही काम कर रही थीं

और जनता !

उसके चेहरे पर

न कोई दुख था न चीत्कार

सब दाद देते हुए कह रहे थे -

मजा आ गया ,यार मजा आ गया यार।"

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