मिल भी जाते हैं तो कतराके निकल जाते हैं
हाय मौसम की तरह दोस्त बदल जाते हैं
हम अभी तक हैं गिरफ्तारे मोहोब्बत में यारो
ठोकरे खाके सुना था लोग संभल जाते हैं
वो कभी अपनी जफा पर हुए न शर्मिंदा
हम समझते रहे की पत्थर भी पिघल जाते हैं
उम्र भर जिनकी वफाओ पे हमने भरोसा किया
वक्त पड़ने पर वोही लोग बदल जाते हैं
हाय मौसम की तरह दोस्त बदल जाते हैं
हम अभी तक हैं गिरफ्तारे मोहोब्बत में यारो
ठोकरे खाके सुना था लोग संभल जाते हैं
वो कभी अपनी जफा पर हुए न शर्मिंदा
हम समझते रहे की पत्थर भी पिघल जाते हैं
उम्र भर जिनकी वफाओ पे हमने भरोसा किया
वक्त पड़ने पर वोही लोग बदल जाते हैं
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