देखो कैसे डालर मुंह फाड़े खड़ा है
कहने को तो अपना रुपया सबसे बड़ा है
पैसे जो कमाते घर खर्च मुश्किल से खिचता
है
रुपये
वाले देश में सामान डालर के भाव बिकता है
कहता वो
१२ में खाना पर कंहा वो होटल है
अरे भाई
२० की तो यंहा पानी की बोटल है
बद से
बदतर और बदनाम हो गए
है आज़ाद
फिर भी गुलाम हो गए
किन किन
चीजो में हमने नहीं किया घोटाला
कभी चारे
में सने हाथ कभी कोयले से मुंह काला
कभी
घोटालें तोपों की घोटालों के हेलीकाप्टर उड़ायें हैं
देश को
बेच दिया ताबूतों में भी हमने पैसे खाएं हैं
कर दें
किसी में भी घोटाला घोटालों के सरताज हैं हम
बिमारी
खाने की बड़ चुकी अब लाईलाज हैं हम
हमारी वज़ह
से गाँव शहर शमशान हो गए
है आज़ाद
फिर भी गुलाम हो गए
किसी को याद
नहीं की कैसे मिली आज़ादी
आज सबसे
ज्यादा बदनाम है खादी
सिर्फ और
सिर्फ पैसे खाने राजनीति मैं आये हैं
बनते ही
कुछ, कमाई के नए नए तरीके अपनाए हैं
देश की
नहीं सबको कुर्सी की चिंता सताती है
और बैठते
ही कुर्सी पे जनता को मुंह चिड़ाती है
किसी नें
खिंची नहीं इसलिए बे-लगाम हो गए
है आज़ाद
फिर भी गुलाम हो गए
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