Sunday, March 9, 2014

किनारा मिल जाये

डूबती कश्तियों को किनारा मिल जाये.......
तेरा साथ ऐ ज़िंदगी दोबारा मिल जाये .........

बहुत अकेले से हो गए हैं शहर में आके........
तेरे शहर में अब कोई हमारा मिल जाये …….

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