फिर चलनी यहाँ तेज आंधी चाहिए
देश के लिए फिर एक गांधी चाहिए
देश के लिए फिर एक गांधी चाहिए
हो रहा है फिर से देश ये ग़ुलाम
आज फिर वतन को आजादी चाहिए
आज फिर वतन को आजादी चाहिए
क्यूँ रहे ग़रीब अब देश ये मेरा
देश में अपने हमें सोना चांदी चाहिए
देश में अपने हमें सोना चांदी चाहिए
लूट कर ले गए वतन को जो लोग
देश में उनके हमे बर्बादी चाहिए
देश में उनके हमे बर्बादी चाहिए
हाथ से बुनी थी जो गांधी ने कभी
तन पे हमे आज वही खादी चाहिए
तन पे हमे आज वही खादी चाहिए
ना रहे ग़रीब कोई और ना भूखा
सबके लिए घर बने और रोटी चाहिए
सबके लिए घर बने और रोटी चाहिए
दूर हो मंहगाई और अब मिले सुकून
बक्श दो जरा सी मेहरबानी चाहिए
बक्श दो जरा सी मेहरबानी चाहिए
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