कवि सम्मेलन के समाप्त होने पर
रात के तीन बजे
मैं अपने घर की ओर जा रहा था
दिन भर की थकान से थकी
सुनसान सड़क पर
सामने से एक पुलिसमैन आ रहा था
मिलते ही नजरें
वह मुझे देखकर हँसा
और मैं उसे देखकर घबराया
वह इसलिए हंसा
कि सुबह-सुबह अच्छा मुर्गा फंसा
और मैं इसलिए घबराया
कि मंगलवार के दिन
यह शनिचर कहां से आ टकराया
जैसे ही उसने
अपनी मूँछों पर दो मरोड़ दिए
मैंने अपने दोनों हाथ जोड़ दिए
फिर कहा -
"हे !कोमलांगियों के शील के रक्षक
नेताओं के अंग के रक्षक
आप महान हो
आप को मेरा प्रणाम हो "
सिपाही अपनी प्रशंसा सुनकर
फूला नहीं समाया
उसने अपनी मरणासन्न बीड़ी में
अंतिम कश लगाया
फिर मुर्गी फँसाऊ
पुलिसिया अदा में बोला -
"ठीक है... ठीक है...
मेरी बढ़ाई की बातें करके
ज्यादा होशियारी मत जता
अपना नाम -पता बता "
मैंने कहा -
"मेरा नाम -बलात्कार
पिता का नाम -भ्रष्टाचार
मां का नाम -महंगाई
गांव -राजधानी दिल्ली
मोहल्ला -छल
मकान नंबर -राजनीतिक दल "
वह बोला -"
यह तुम अपना पता बता रहे हो
या मुझे
भारत का नक्शा दिखा रहे हो "
मैंने कहा -"नक्शा ही दिखा रहा हूं
और तुम्हें इसलिए बता रहा हूं
कि तुम देश के सिपाही हो
सिपाही का मतलब जानते हो ?
सिपाही ने आंखें तरेर कर कहा -
"हां !जानता हूं "
मैंने कहा -"जानते हो तो फिर यह
गुंडागर्दी क्यों बढ़ रही है ?"
सिपाही हंसकर बोला -
"यार ,आदमी तुम मजेदार हो
चलते -फिरते दैनिक अखबार हो
अफ़वाहों के सहारे खड़े हो
पर एक बात बताओ
तुम बेचारी पुलिस के पीछे क्यों पड़े हो
ये सज्जन पुलिस वाले
किसी का क्या बिगाड़ते हैं ?
मैंने कहा -"पुलिस और सज्जन !
भेड़िया और शाकाहारी !!
आप की वर्दी से
सज्जनता की कैसी सुगंध आ रही है
पर श्रीमान जी !आपकी यह जेब
गर्भवती महिला के पेट -सी
क्यों फूलती जा रही है ?"
उन्होंने फरमाया
एक बच्चे की तरह मुझे समझाया
"फूलना अर्थात फैलना
विकास का सूचक है
गर्भवती महिला का पेट दर्शाता है
जनसंख्या के विकास को
लाला का पेट
मिलावट के विकास को
देखते नहीं
सारा देश फूल रहा है
लेकिन मेरी जेब देखकर
आपका दम क्यों फूल रहा है ?"
मैंने कहा -"नाराज मत होइए
जरा मुस्कुराइए
मुझे एक बात और बताइए
आप की वर्दी का रंग ख़ाकी क्यों है ?"
वह बोला -
"सब कुछ खाक में मिलाने के लिए "
मैंने कहा -वाह खाकेश जी
अमावस्या के राकेश जी
आप वाकई महान हैं
पर सुना है
बलात्कार के पुण्य कार्य में
आप का बहुत योगदान है "
वह बोला -"बलात्कार ।
यह क्या बला है ?"
मैंने कहा -ये
खूनी भेड़ियों के
मनोरंजन की एक कला है
जिसमें तुम लोगों का
बहुत बड़ा हाथ है ।"
सिपाही ने अकड़ कर कहा -"
हाथ है तो है
कर ले हमारा क्या करेगा ।
साला ,हमारे बलात्कार को
देख कर रो रहा है
अबे बलात्कार के बच्चे
इस देश में ,आज़ादी के बाद से
बलात्कार के सिवाय
और क्या हो रहा है ?
वहां देख
जज का कायदों से
नेता का वायदों से
नारों से ,आश्वासनों से
जनता का सरकार से
सरकार का जनता से
देश से
और यहां तक कि
बलात्कार से बलात्कार हो रहा है
उन्हें तू कुछ नहीं कहता
महिलाओं को बीच में घसीट रहा है
मुझे छेड़ -छेड़ कर उकसाएगा
एक और बलात्कार करवाएगा
अच्छा...अब बहुत देर हो गई
तू कुछ न कुछ पूछे जा रहा है
इतनी रात गये
तू कहां से क्या कर के आ रहा है ?"
मैंने कहा -"भाई साहब
मैं भी आपकी तरह शरीफ आदमी हूं
मैं शब्दों के साथ
बलात्कार करके आ रहा हूं
मैं ही नहीं
वहां अधिकांश लेखनियाँ
यही काम कर रही थीं
और जनता !
उसके चेहरे पर
न कोई दुख था न चीत्कार
सब दाद देते हुए कह रहे थे -
मजा आ गया ,यार मजा आ गया यार।"
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