एक दिन मैंने अखबार में पढ़ा
जेल में मिलती है सुविधाएं आलीशान
देखने को रंगीन टीवी
पढ़ने को पत्र पत्रिकाएं
और खाने को मिलते हैं
एक से एक बढ़िया पकवान
यह पढ़कर मुझ बेरोजगार को लगा
कि यहां तो मिलती हैं फाइव स्टार सुविधाएं नौकरी
ढूंढने से तो अच्छा है
किसी तरह जेल ही चला जाए ।
अब मुझे दिन में रात में
सर्दी गर्मी बरसात में
कश्मीर की वादियों की जगह
जेल के हसीन, रंगीन,दिलकश
सपने आने लगे
रोज रोज लुभाने लगे
मेरी आत्मा मुझे बार-बार कचोटती
मूर्ख कवि सम्मेलन में चला जाता है
इससे अच्छा जेल क्यों नहीं हो आता है
जेल जाने की धुन में
मैं इस कदर बीमार पड़ गया
मलेरिया की जगह
जेल एरिया में जकड़ गया
इस अवस्था में मैं
घर पर भी कैदियों वाले कपड़े पहने लगा
और घर की खिड़की के सींखचो पर
बैठने लगा
जब -जब भी कोई मेहमान मिलने आता
तो मुझे ऐसा लगता
जैसे जेल में कोई मिलाई करने आया
जब बात हद से आगे बढ़ गई
तो मेरे पैरों की जोड़ी
तिहाड़ जेल की ओर बढ़ गई ।
मैंने वहां देखा
एक कैदी रिवाल्विंग चेयर पर बैठा
रसमलाई खा रहा था
और एक पुलिस वाला
उसके पैर दबा रहा था
और साथ-साथ गिड़गिड़ा रहा था
-"भाग जा -भाग जा मेरे बाप
कब तक हमारी छाती पर मूंग दलेगा
चालीस किलो से
अस्सी किलो का तो हो गया
और कितना पलेगा "
कैदी मुस्कुराया -"ज्यादा मत गिड़गिड़ाओ
जाओ हमारे लिए किंग साइज की सिगरेट
और एक जोड़ा पान लेकर आओ
सिपाही के जाते ही
मैंने कैदी को दंडवत प्रणाम किया
और कहा -"हे महान आत्मा मेरा मार्गदर्शन कीजिए
मेरी जेल जाने की हार्दिक इच्छा है
इन चरणों में जगह दीजिए
कोई उपाय बताइए और किसी भी तरह से सही मुझे जेल ले
जाइए "
कैदी पिंघला-"अच्छा ,तो तू जेल जाएगा मिठाई और पकवान
खाएगा
ऐसा कर किसी की टांग तोड़ दे
या अपनी खोपड़ी किसी की खोपड़ी से भेड़ दे या फिर कोई
लड़की छेड़ दे "
यह ब्रह्म वाक्य लेकर मैं वापस घर आया
और तुरंत अपनी खोपड़ी लेकर
एक गंजे पड़ोसी की खोपड़ी को
काफी नुकसान पहुंचाया
पर उसे तो गुस्सा ही नहीं आया
मैं चकराया और बोला -"जा जा फौरन पुलिस में
रिपोर्ट लिखा "
लेकिन वह मुस्कुराया बोला -"अच्छे बच्चे ऐसा
नहीं करते "
और मुझे घर छोड़ आया ।
एक दिन मैंने मोहल्ले के एक
आवारा लड़के की टांग तोड़ दी
और घर पर करने लगा इंतजार
कि पुलिस वाले अब आयें अब आएं
लेकिन थोड़ी देर बाद ही
मोहल्ला सुधार समिति के कुछ सदस्य आए बोले
-"आपने उस आवारा की टांग तोड़ी धन्यवाद
हम सार्वजनिक रूप से
आपकी प्रशंसा करना चाहते हैं
और इस पुण्य कार्य के लिए
आपका अभिनंदन करना चाहते हैं "।
अभिनंदन के एक हफ्ते बाद
वही आवारा लड़का मेरे घर आया
और मिठाई के डिब्बा मेरे हाथ में थमाया
फिर बोला -"आपसे मिलकर तो
मेरी जिंदगी बदल गई
उस दिन आपने टांग तोड़कर
मुझे विकलांग किया
और इस चक्कर में मुझे नौकरी मिल गई
मैंने सोचा अब तीसरा उपाय क्या किया जाए बस में
किसी लड़की को ही छेड़ दिया जाए
बस में घुसते ही मैंने
एक सुंदर कन्या की तरफ आंख चलाई
वह कुछ नहीं बोली
तो मैंने उसकी उंगली दबाई
लेकिन वह तो कमाल थी
उसने अपनी उंगली ही नहीं हटाई
उंगली से हम थोड़ा और आगे बढ़े
तो दो पुलिस वाले हमारे सर पर आ चढ़े
बोले -"शर्म नहीं आती सरेआम लड़की को छेड़ता है
अपनी ऊंगली उसकी उंगली से भेड़ता है
तभी तीसरे पुलिस वाले ने उन्हें टोका
-"अभी रहने दे -रहने दे
सस्पेंड कर देगा दरोगा
सरेआम लड़की छेड़ रहा है
जरूर किसी बड़े बाप का बेटा होगा "
पहले वाला बोला -"नौकरी गई भाड़ में
यह बड़े बाप के बेटे
ऐसा ही करते हैं शराफत की आड़ में "।
लड़की दरअसल छिढी ही नहीं थी
उंगली उसकी उंगली से भिढ़ी ही नहीं थी इसलिए वह बीच
में बोली -"भाई साहब ,
क्यों इतने हैंडसम लड़के को बदनाम करते हैं इन्होंने
तो मुझे छेढ़ा ही नहीं
उस लड़की को छेड़ना मुझे और सता गया क्योंकि शाम को
ही उसका बाप
रिश्ता लेकर आ गया ।
एक दिन मैं एक बड़े से होटल में पहुंचा
वहां छत्तीस प्रकार के
व्यंजनों का आनंद उठाया
और जब बिल देने का नंबर आया
तो मुंह बिचकाया
होटल वाला समझदार था
तुरंत पुलिस को फोन मिलाया
पुलिस वाले आए
और मुझे सीधे अदालत ले गए
लेकिन अपनी तो किस्मत खराब थी
इस बार मुझे जज साहब गच्चा दे गए
बोले -"हम इंसाफ करते हैं
तुम्हारा पहला अपराध है
इसलिए माफ करते हैं "।
एक दिन मैंने
एक महिला का पर्स चुराया
और भागा-भागा पुलिस स्टेशन आया
वह महिला वहीं बैठी पाई
और जैसे ही उसने
पर्स चोरी जाने की रिपोर्ट लिखवाई
मैंने तुरंत पर्स को थानेदार के आगे सरकाया और हथकड़ी
लगवाने की मुद्रा में
अपने हाथों को बढ़ाया
थानेदार ने मेरे हाथों को झिड़क दिया
-"हूँ, मुफ्त में ही जेल जाना चाहता है
"
इतना कहकर उसने एक फोन मिलाया
और अपने साले को थाने में बुलाया
मुझे दो डंडे मार कर वापस भिजवा दिया
और पर्स चुराने के आरोप में
उस साले ने अपने साले को अंदर करवा दिया
उसके बाद मैंने कितने ही प्रयास किए
कुछ जानबूझकर कुछ अनायास किए
पर जेल वाले तो मुझसे खाए हुए थे खार
मुझे मुझे जेल में ले जाने को नहीं थे तैयार लेकिन
मैंने जहां-जहां भी
ये कविता सुनाई
लोगों की भावनाओं ने ली
ऐसी अंगड़ाई
की सबकी इच्छा जेल जाने की हो आई
लोगों पर इस कविता का इतना प्रभाव पड़ा
कि चारों ओर जेल भरो आंदोलन चल पड़ा कैदियों की
संख्या हो गई ज्यादा
और पुलिस उन्हें छोड़ने पर थी आमादा
एक बार तो पुलिस वालों ने
कैदियों की आत्मा ही झिंझोड़ दी
कैदियों के भागने के लिए
जेल की दीवार खुद ही तोड़ दी
पर उनके तो सारे आइडिये ही
उल्टे पड़ गए
अगले दिन गिनती हुई
तो एक सौ पच्चीस कैदी
ज्यादा बढ़ गए
अब तो मुझे
पाठकों से ही कुछ उम्मीद है
इतना क्वालिफाइड अपराधी
खुले आम घूम रहा है
जेल जाने के लिए कोई सोर्स ढूंढ रहा है
अब आप ही कुछ उपाय बताओ
किसी भी तरह से सही
मुझे आप जेल तो भिजवाओ
वैसे आप भी क्या उपाय बताओगे ?
अगर आपके पास ही कुछ उपाय होते
तो इस समय आप
घर पर या पुस्तकालय में नहीं
बस हवाई जहाज या रेल में नहीं
बल्कि जेल में मेरी यह कविता पढ़ रहे होते।
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