बादशाहों के सलाम आते हैं,
फ़क़ीरों को यूँ पैगाम आते हैं.
घर में मेले लगते हैं आशिकों के,
हमें आशिक़ी के हुनर तमाम आते हैं.
फ़क़ीरों को यूँ पैगाम आते हैं.
घर में मेले लगते हैं आशिकों के,
हमें आशिक़ी के हुनर तमाम आते हैं.
दिल्लगी करता है महबूब हमारा,
अब ख़त भी हमें बेनाम आते हैं.
बख़्त फ़क़ीरी
अब ख़त भी हमें बेनाम आते हैं.
बख़्त फ़क़ीरी
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