Wednesday, September 24, 2014

महँगी शराब पीता हूँ

मैं उसकी आँखों से छलकी शराब पीता हूँ
फ़क़ीर हो के भी महँगी शराब पीता हूँ

तुझे देखूँ तो पहचानने में देर लगे
कभी-कभी तो मैं इतनी शराब पीता हूँ

मुझे नशे में बहकने कभी नहीं देता
वो जानता है मैं कितनी शराब पीता हूँ

पराये पैसों से अय्याशियाँ नहीं की हैं
मैं जब भी पीता हूँ अपनी शराब पीता हूँ

पुराने चाहने वालों की याद आने लगे
इसीलिए मैं पुरानी शराब पीता हूँ

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