तनहा जीने की मुझको इतनी आदत हो गयी
के अब खुद की परछाई पर गुमान सा रहता है
देख आइना में खुद को दिल सहम उठता है
तनहा रातों में
अक्सर खुद की धड़कन सुनकर डर सा लगता है
के अब खुद की परछाई पर गुमान सा रहता है
देख आइना में खुद को दिल सहम उठता है
तनहा रातों में
अक्सर खुद की धड़कन सुनकर डर सा लगता है
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