Friday, January 5, 2018

नया साल

आज श्रीमति जी और बच्चों का वार्तालाप
मेरे कानों में भी पड़ गया अपने आप,
वो कह रही थी कि तुम्हारे पापा भी
बिल्कुल लड़के लगते थे कभी,
"थे" शब्द सुनके लगा जैसे
आकाश से बिजली तड़तड़ा कर
और गिरी हो मेरे ऊपर आकर।
और हो गया मैं बेहोश
जब थोड़ी देर बाद आया होश,
तो थोड़ा दिमाग लगाया
और मैंने ये पाया,
कि हम हर बार ,,,,,,,,हर साल
स्वागत करते हैं, मनाते हैं, नया साल,
और ये नया साल,, हमे क्या देता हैं
हमे एक साल और ,,,बूढ़ा बना देता है।
बहुत से लोग नही रखते होंगे इतेफाक
कह रहे हैं बूढा होगा तू और तेरा बाप,
हम तो जवान हैं और
ख्यालों से तो पूछिये मत ,,कितने ज्यादा
भले ही मुह में दाँत नही
और चने खाने का ,,रखते हैं इरादा।
युवा रहने की चाहत बात अच्छी है
लेकिन ये बात भी उतनी ही सच्ची है,
कि वक्त सदैव रहता है गतिमान
और इसकी गाड़ी में
सफर करता है हर इंसान।
वर्तमान की मशीन में
भविष्य एक कच्चा माल है
जो बदलता है अतीत के उत्पाद में
जैसे बीता हुआ साल है।
हर किसी को बूढापा आना है
और फिर एक दिन
दुनिया से गोल हो जाना है,
मगर इसमे क्या गम है
ये तो सृष्टि का नियम है।
तो मेरे दोस्तों वर्तमान के
इन पलो को जियो यूँ जी भर के
कि जब जाओ अतीत में
तो आये ये सुनहरी यादे उभर के,
और जब भी ये आपको याद आये
तो आप रह ना सको बिना मुस्कुराये।

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