मुझे पूजना नहीं है आता, क्या मस्जिद और देवाला है
।
मुझे पूजना उसको आता, जो भारत का रखवाला है ।
धर्म नहीं उसका कोई भी, बस देश धर्म पर मरता है ।
अगर जरूरत आन पड़े तो, बलिदान देश पर करता है ।
उसके आगे कितना छोटा, लगता यह हिमाला है ।
मुझे पूजना उसको आता, जो भारत का रखवाला है ।
मुझे पूजना उसको आता, जो भारत का रखवाला है ।
धर्म नहीं उसका कोई भी, बस देश धर्म पर मरता है ।
अगर जरूरत आन पड़े तो, बलिदान देश पर करता है ।
उसके आगे कितना छोटा, लगता यह हिमाला है ।
मुझे पूजना उसको आता, जो भारत का रखवाला है ।
जन्म दिया है जिस माँ ने, मैं उसको शीश झुकाता हूँ ।
चरण जहाँ पर उसके पड़ते, मैं तो अर्घ्य चढ़ाता हूँ ।
जिसने छाती से दूध पिलाकर, उसको वज्र बनाया है ।
वह बेटा ही सैनिक बनकर, काम देश के आया है ।
भारत माँ ने शूरवीर यह, बड़े ही नाज से पाला है ।
मुझे पूजना उसको आता, जो भारत का रखवाला है ।
चरण जहाँ पर उसके पड़ते, मैं तो अर्घ्य चढ़ाता हूँ ।
जिसने छाती से दूध पिलाकर, उसको वज्र बनाया है ।
वह बेटा ही सैनिक बनकर, काम देश के आया है ।
भारत माँ ने शूरवीर यह, बड़े ही नाज से पाला है ।
मुझे पूजना उसको आता, जो भारत का रखवाला है ।
पतिव्रता इसकी जो नारी, उसको भी शीश झुकाता हूँ ।
त्यागमूर्ति के बलिदानों की मैं गौरवगाथा गाता हूँ ।
जब जब भी इसका साजन चिरनिद्रा में सो जाता है ।
तब तब भार देशरक्षा का इस पर ही आ जाता है ।
शस्त्र उठाकर बन वीरांगना इसने ही देश संभाला है ।
मुझे पूजना उसको आता, जो भारत का रखवाला है ।
त्यागमूर्ति के बलिदानों की मैं गौरवगाथा गाता हूँ ।
जब जब भी इसका साजन चिरनिद्रा में सो जाता है ।
तब तब भार देशरक्षा का इस पर ही आ जाता है ।
शस्त्र उठाकर बन वीरांगना इसने ही देश संभाला है ।
मुझे पूजना उसको आता, जो भारत का रखवाला है ।
झंझावत में पला बड़ा है, विपदा से घबराए ना ।
आगे बढ़ता ही यह जाए, पीछे कदम हटाए ना ।
हिन्द देश के इस वासी से, बैरी भी थर्राता है ।
छिपकर वार भले ही कर ले, पर नहीं सामने आता है ।
एक हाथ में लिया तिरंगा, दूजे में शस्त्र संभाला है ।
मुझे पूजना उसको आता, जो भारत का रखवाला है ।
आगे बढ़ता ही यह जाए, पीछे कदम हटाए ना ।
हिन्द देश के इस वासी से, बैरी भी थर्राता है ।
छिपकर वार भले ही कर ले, पर नहीं सामने आता है ।
एक हाथ में लिया तिरंगा, दूजे में शस्त्र संभाला है ।
मुझे पूजना उसको आता, जो भारत का रखवाला है ।
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