Sunday, December 24, 2017

मानव सेवा रब की पूजा


बीच बाजार एक आदमी गिरकर मर गया ,
सारे शहर में आम यह चर्चा हो गया ।
कोई कफन, तो कोई पैसा दे गया,
प्रबंध उसके क्रियाकर्म का हो गया ।

अर्थी पर जब उसको लिटाकर ले जाने लगे,
रास्ते में बारिश के छीटें आने लगे ।
पानी ज्यों मुँह पर पड़ा, मुर्दा हरकत करने लगा ।
भूख से बेहोश हुआ था, रोटी-रोटी रटने लगा ।

देखकर मुर्दे में हरकत, लोग दहशत खाने लगे ।
बिना सोचे समझे ही, भूत-भूत चिल्लाने लगे ।
सुनकर नाम भूत का, लोगों में भगदड़ मच गई ।
किसी का जूता-चप्पल छूटा, किसी की धोती खुल गई ।

देखने को उसको फिर, कोई भी वहां ना रहा ।
जीवित रहने का उसके, यह अवसर भी जाता रहा ।
रोटी-रोटी करता वह तो, राम-राम कर गया ।
कुछ ही पलों में वह तो, सचमुच का मुर्दा बन गया ।

कोई यहाँ रोटी को तरसे, कहीं अन्न सडे गोदामों में ।
पैसे-पैसे को मोहताज कोई, कोई उड़ाये व्यर्थ के कामों में ।
मालिक सद्बुद्धि दो तुम, उन लाला साहूकारों को ।
धन-दौलत बाँटें दुखियों में, प्यार तेरा वे पाने को ।

ईश्वर भी खुश होता है, सेवा से इंसान की ।
मानव सेवा रब की पूजा, कहते वेद-कुरान भी ।

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